मगर खाम भाषाला सोमोलो मुक्तक पूर्णबहादुर बुढामगर १७ माघ २०८०, बुधबार मुक्तक – टोबोआउँ जिन्दगी इताउ ज लेउ संघर्ष दादे बाउँ परिन्यासुख ल