मगर भाषा कविता : गोघोल्या डी.बी. मगर ‘स्वेद’ २ असार २०८१, शनिबार मासन,कतानी नहुओ तानाम्क स्यान्य मीन त ङाङाकखेउ क्वाइसिदे,पेताङ्ङे पोसिदेह्वाङ ल खोर्चो सुर्सिदे,ङै