गेथाती

मगर खाम भाषाला सोमोलो मुक्तक

पूर्णबहादुर बुढामगर
१७ माघ २०८०, बुधबार

मुक्तक – टोबो
आउँ जिन्दगी इताउ ज लेउ संघर्ष दादे बाउँ परिन्या
सुख ल दु:ख जति व-हुदेमनी चोखो युङस साउ परिन्या
बाचिउँ परि सधैभरी है लेशिउ मा ताइची खर्कज
प्राकृतिक ए व-नियम ज लेउरैछ सिदे माउ परिन्या ।

मुक्तक – नेबोलो
जिन्दगी बगिज्याउ खोला वलेउरैछ
जुनि मि-एउ-मि तखेपला चोला वलेउरैछ
सिदे कता लाङो लेदा आउ जुनिल
सिसिकेत आउ क्याङ खाली झोला वलेउरैछ ।

मुक्तक – सोमोलो
गाडी मोतर स्याउ गुदिज्या जिन्दगी
नम्त जहाज स्याउ उदिज्या जिन्दगी
थाहा माले सुलैज कता बेला कैतान्या
आउ संसार ल बाथैज मुदिज्या जिन्दगी ।
०००
रोल्पा–९ लाटाबाङ, रोल्पा

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